गुरु-शिष्य परंपरा


कोरे कागज़ पर जिसने लिखना सिखाया,
सही गलत का फर्क समझाया,
अपने आप से रूबरू करवाया,
दुनिया की पहचान कराई,
अंधकार जीवन में ज्ञान की रोशनी जलाई ।

संबंध ऐसा जो गुरु और शिष्य का दर्पण दिखाए ,
सही मार्ग पर चलकर, ऊंचे शिखर तक पहुंचाए ,
गुरु वही हैं जो मन में ज्ञान की ज्योति जगाए ।

जिसने तराश दिया हीरे की तरह हमको,
पहचान करवा दिया संसार से हमें,
मुश्किलों में तुम आगे बढ़ो, 
ऐसा समझदार बना दिया हमें ।

फूलों की तरह महकना सिखाया,
सूरज की तरह जल कर चमकना सिखाया,
जाति-धर्म का भेद न समझकर, 
सबको एक जैसा सम्मान दिलाया ।

बिना गुरु कोई ज्ञानी नहीं,
हार के बाद भी जीत का हुनर सिखा दे,
गुरु वही जो इसानियत की पहचान करा दे।

कठिन मार्ग से गुजर कर,
सफ़लता के रास्ते पर चलना सिखाया,
हौंसला, उम्मीद, आत्मविश्वास जगाकर,
हमें अपने आप से पहचान कराया ।

वही गुरु हैं,जो अपने आप से वाकिफ करा दे,
पौधे से वृक्ष बना दें,
गुरु वही जो दया का भाव जगा दें,
छांव और धूप का ऐसा एहसास,
जो गुरु और शिष्य के संबंध को बता दे ।


---- अनुराधा मिश्रा (लहरियासराय, दरभंगा, बिहार)

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