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Showing posts from July, 2021

उफ्फ ! ये गर्मी

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उफ़्फ़! कैसी है ये गर्मी, बहुत सता रही है ये गर्मी । हवा है, पर ठंडी नहीं, पानी है ,पर प्यास बुझती नहीं । सूरज की किरण है , पर अब वो छाओ नहीं , खेत हैं पर बदलो में वर्षा नहीं । सुख गए है वो सारे नदी-तलाब, जिस पर लिखे गए कितने किताब । घाटों की रौनक फीकी पड़ गयी, धरती पानी की एक बूंद को तरस गयी । ना बजती हैं वो बंसी नदी किनारे, जिसे सुन पंछी लगते थे चहचहाने । उम्मीद तो है ऊपर वाले से, बुझेगी इस धरती की प्यास, तब, जब हम छोड़ेंगे करना, इस प्यारी धरती का उपहास। यहाँ सुने:- https://anchor.fm/aditya-rai79/episodes/ep-e1611bl -- आदित्य राय (काव्यरंग)

कॉलेज के दिन

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वो कॉलेज के दिन, वो क्रिकेट तेरे बिन । वो लाइब्रेरी की पढ़ाई, जब देख किसी को लेते थे हम अंगड़ाई । तरंगों की तलाश में, भटकते थे दिन रात, खुश होते थे हम, जब बन जाती थी अपनी बात । वो बोरिंग से लेक्चर, जब ऊपर से जाता था हर चैप्टर । वो नौकरी पाने की धुन , वो अपनी किस्मत से लड़ाई, वो साथियों की हौसलाअफजाई । सब समेटे रख रहा हूँ मैं, अपनी यादों की किताब में । उस दिन के लिए जब मिलेंगे, जिंदगी के किसी मोड़ पर । तब तक करेंगे याद साथ बिताए हर लम्हे को , चलो अब जीते हैं फिर से  इस दूरी को । यहाँ सुने:- https://anchor.fm/aditya-rai79/episodes/ep-e15s4s9/a-a6bavg0 --आदित्य राय (काव्यरंग)

जीवन की रेस

"जीवन की रेस " कौन कहता हैं जीवन एक रेस है, जीवन देती एक प्यारा सन्देश है । फूलों को देखो ,खिलती हैं, हवाओं में खुशबू बिखेरतीं हैं, मुरझाने तक, अपनीे ख़ुशबू को किसी से न तोलती हैं । https://t.co/lFefEbaEKm -- (काव्यपल) — Kavyapal - Hindi Poems (@kavyapal123) January 6, 2022