बाढ़ का पानी
गांव में बाढ़ का पानी, ये बात सभी ने जानी । डूब गया वो घर जो सपनो को संजोता था, बह गई वो आशा, जिन्होने जीवन को दी थी परिभाषा । ना अब वो गांव है, ना उन पेड़ो की छांव है, बह गया बाढ़ में मेरा गांव है । दुनिया में घूम रहा अब पनाह के लिए, खाने , रहने को देने वाले निगाह के लिए । खेतो की फसल लूट गया बाढ़, बर्बादी का दे गया अंबार । बिजली, पानी , रास्ते, ना अब हमारे वास्ते । नैया भी डूब जाती है, मौत भी गले लगाती है। कोई न अब अन्नदाता है, पसरा चारो ओर सन्नाटा है । गांव में बाढ़ का पानी है बात सभी ने जानी । -- आदित्य राय (काव्यरंग) यहाँ सुने:- https://open.spotify.com/episode/3aVlgyFoshgr7U6nEKeYly?si=WEJOB_R7QBCIAGfvgXrmtw&dl_branch=1