भीख
क्यूं मांगे कोई भीख, जब जीवन में हो सब ठीक। कभी कोई मां मांगती भीख, बच्चों के पेट के लिए । कभी कोई बाप मांगता भीख, रात की चादर ओढ़ने के लिए । कभी कोई बूढ़ी मांगती भीख, अपनी दवाई के लिए । कभी कोई बूढ़ा मांगता भीख, बेटी की विदाई के लिए । हम बोल देते उन्हें भीखमंगे, क्या सोंचा हमने कभी क्या बीत रही उनके जीवन में । दिन बितती बिना कोई रोटी, बदन पे होती ना कोई धोती, घिस जाती एक साड़ी पूरे जीवन में, छांव की तलाश में बीत जाता है जीवन, धूप की किरण में । क्यूं मांगे कोई भीख जब जीवन में हो सब ठीक । यहाँ सुने:- https://anchor.fm/aditya-rai79/episodes/ep-e1612cv -- आदित्य राय (काव्यरंग)