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भीख

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क्यूं मांगे कोई भीख, जब जीवन में हो सब ठीक। कभी कोई मां मांगती भीख, बच्चों के पेट के लिए । कभी कोई बाप मांगता भीख, रात की चादर ओढ़ने के लिए । कभी कोई बूढ़ी मांगती भीख, अपनी दवाई के लिए । कभी कोई बूढ़ा मांगता भीख, बेटी की विदाई के लिए । हम बोल देते उन्हें भीखमंगे, क्या सोंचा हमने कभी क्या बीत रही उनके जीवन में । दिन बितती बिना कोई रोटी, बदन पे होती ना कोई धोती, घिस जाती एक साड़ी पूरे जीवन में, छांव की तलाश में बीत जाता है जीवन, धूप की किरण में । क्यूं मांगे कोई भीख जब जीवन में हो सब ठीक । यहाँ सुने:- https://anchor.fm/aditya-rai79/episodes/ep-e1612cv -- आदित्य राय (काव्यरंग)

सफ़र की छाँव

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कानो में गूंजती छुक छुक की आवाज़, शायद मन को दूर जाने का एहसास कराती है । कुछ लोग पुकार रहे होते हैं मंजिल की तरफ, कुछ लोग पुकार रहे होते हैं साहिल की तरफ । मन स्थिर होकर भी महसूस न करना चाहता , अपनो से दूर जाने के एहसास को । शायद सफ़र की उन लंबी रातों के लिए बचा लेते हैं, हम उन एहसासों को , उन सिसकती आवाज़ो को । अनजानों के साथ सफ़र करना मुश्किल ना होता , अगर राहों में अपना साथी हमसफर सा होता, मंजिल के बारे में सोचता मन शांत पंछी सा होता, भीड़ में शायद अपनो के होने का भी एहसास होता । लंबे सफर को भी नहीं पता होता की वो इतनी लंबी हो जायेगी । खेतो , पहाड़ों, नदियों, शहर, गांव, हवा, पानी, दरिया, पेड़ो की छांव, उन रास्तों के उबासी के वो भाव । लगता हैं जैसे मंजिल पुकार रही हो,  अपने आवाज़ को बुलंद कर रही हो । आना है तुम्हे , अधूरे कुछ काम रह गए हैं, जीवन की डोर के कुछ पहलू  अभी खोलने को बाकी रह गए हैं । यहाँ सुने:- https://anchor.fm/aditya-rai79/episodes/ep-e1612qf -- आदित्य राय ( काव्यरंग )

सुकून

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मैं एक मुस्कुराता चेहरा हूं, हजारों ख्वाहिशों से लिपटा, हजारों बंदिशों में जकड़ा, रिश्तों के कच्चे धागों को सहेजता, एक डरता हुआ मन, पर एक खिलखिलाता चेहरा हूं । मैं जीता हूं जरूर पर खुल के नहीं, होठों पर मुस्कान तो हैं पर वो सच्ची नहीं, पता नहीं क्या ढूंढता हूं अपने आस पास, पर वो जो भी है, इतनी आसानी से मिलता नहीं । एक तलाश है जो कब से कर रहा हूं, चलते चलते थक रहा हूं, फिर रुक रहा हूं, शायद देखा है उसे  एक नन्ही सी जान  की मुस्कान में, सब कहते हैं जिसे ढूंढ रहा हूं, सुकून कहते हैं उसे, जो नहीं मिलता आज भी किसी बड़ी दुकान में । -- मोनिका ( काव्यरंग ) Pic credits : Suman Sourabh

मेरा छोटा शहर

सोच की धाराएं

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सोच की धाराएं हैं अनेक, समस्याएं सुलझाती सब एक । अनंत हैं इस धरती पर रूप प्रकृति के, रंग है अनेक, मिलने पर बन जाती सब एक । नदियां अनेक , झील अनेक समुंदर की लहरों संग लहराती सब एक । पक्षी अनेक , परिंदे अनेक, घोसलों में दाना लेकर जाने की कला है एक । पेड़ अनेक , पौधे अनेक, जड़ से जुड़े रहने की आदत है एक । भाषाएं अनेक , भेष अनेक, घुलने मिलने की भावनाएं है एक । विद्याएं अनेक, कलाएं अनेक, सरस्वती के आंगन में उपजे सब एक । धर्म अनेक ,गुरु अनेक, शांति के उपदेशों संग , ज्ञान की बहती धारा है एक । यहाँ सुने:- https://anchor.fm/aditya-rai79/episodes/ep-e15sq2p -- आदित्य राय (काव्यरंग)

रात की चांदनी

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ऐ चाँद तेरी चाँदनी की कसम, अगर तू ना होता तो, रात में किसे निहारते हम । नीले आकाश में जगमगा रहा है तू, तारो की आगोश में समा रहा है तू । रात की कली हैं तेरी चाँदनी, जिसे तोड़ना चाहता हैं हर आदमी । पूर्णिमा ,अमावस्य तेरे हैं दो छोर, जिसमे समा जाते हैं कई भोर । जुगनू से जगमगाते बल्ब के बीच, तेरी चाँदनी कर रही हर रात को सींच । कितने नगमे लिखे गए तेरी चाँदनी पर, फिर भी ना आया तू इस ज़मीन पर । शायद हमसे रूठा हैं तू, अपनी रोशनी ना होने का गम छुपाता हैं तू । एक बार तू हमारे करीब तो आ, हमें एक बार छू तो जा, तेरी दुनिया में आने को बेताब हैं हम, तेरे दिल में अपना आशियां बनाने को तैयार है हम । यहाँ सुने:- https://anchor.fm/aditya-rai79/episodes/ep-e15tvst -- आदित्य राय ( काव्यरंग )

यादों की तस्वीर

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यादों की दुनिया हैं तस्वीर, जिसके पास है सुनहरी यादेँ, वो हैं दुनिया में सबसे अमीर । बचपन की वो गलियां, घुमाती हैं तस्वीरों की दुनिया । भाई बहन के एक दूसरे के कंधों पे रखे हाथ, वो तस्वीर जिगरी दोस्तो के साथ, नाचते गाते पिकनीक मनाते, एक दूसरे के जन्मदिन में गाते । जवानी की दहलीज़ पर रखते कदम, बचपन की तस्वीरों से दूर जाते वो हम । नए चेहरों का होता हमारे तस्वीरों में आगमन, पुरानी यादों को सहेज मंद मंद मुस्काते हम । जब घर जाते तो पलटते वो एल्बम के पन्ने, पुरानी यादों को समेटना चाहते थोड़े ही पल में । नए लोग पुकारते कहते ,आजा लेले तस्वीर उस पल की, जो खो जाएंगे कुछ ही पल में । वो लोग भी हमसे दूर चले जाते हैं, रह जाते हम उन तस्वीरों के सहारे ही हैं । तस्वीरों की कीमत हम तब ही समझ पाते हैं, जब वो पल हम कही ढूंढ नहीं पाते हैं । हर तस्वीर की कहानी कुछ बयां कर जाती हैं, पुराने पलों की कीमत हमें समझा जाती हैं । तस्वीरों की दुनिया अनोखी होती हैं, थोड़ा हँसाती हैं ,थोड़ा गुदगुदाती हैं । यहाँ सुने:- https://anchor.fm/aditya-rai79/episodes/ep-e15s86q -- आदित्य राय (काव्यरंग)